आई ट्रैकिंग से खरीदार के व्यवहार को बेहतर कैसे समझें

खरीदार का व्यवहार कई सोचे-समझे बिज़नेस फ़ैसलों की जड़ में होता है, और यह समझना लगातार मुश्किल होता जा रहा है कि लोग क्यों खरीदते हैं और हर खरीद के फ़ैसले के पीछे क्या है।

अगर आप उन कंपनियों में से हैं जो लगातार यह समझने की कोशिश में रहती हैं कि ग्राहक खरीदने से पहले कैसे सोचते और व्यवहार करते हैं, तो अंदाज़ों और अंतर्ज्ञान को भूल जाइए: आपको खरीदार की आदतों के बारे में सटीक डेटा चाहिए।

आज का खरीदार समझदार है और अक्सर उसके बारे में अनुमान लगाना मुश्किल होता है। खरीदार के व्यवहार को देखने के कुछ अहम पल होते हैं, चाहे ऑनलाइन हो, खरीद से पहले, खरीद के समय या खरीद के बाद।

इस लेख में हम बताएँगे कि खरीद के पल में खरीदार कैसे सोचते हैं, इसे आप कैसे समझ सकते हैं। हर व्यक्ति अलग होता है, लेकिन उनके व्यवहार में ऐसे पैटर्न होते हैं जिन्हें आप पहचान सकते हैं, और जो उनकी खरीदारी की यात्रा को बेहतर बनाने में आपकी मदद कर सकते हैं।

आगे पढ़ें, अगर आप 3D आई ट्रैकिंग के ज़रिए बेहतर डेटा जुटाना चाहते हैं, जो खरीदार के व्यवहार के अवलोकन, विश्लेषण और समझ को ताकत दे।

खरीदार का व्यवहार और शॉपर डेटा

सबसे पहले, खरीदार का व्यवहार क्या है?

खरीदार का व्यवहार आज पहले से कहीं ज़्यादा जानकारी देता है। पहले यह सिर्फ़ यह समझने में बिज़नेस की मदद करता था कि सामान या सेवाएँ कैसे खरीदी, इस्तेमाल और निपटाई जाती हैं। तब से यह इससे कहीं आगे बढ़ गया है। यह किसी कंपनी से पहले संपर्क से लेकर अंतिम खरीद और उसके बाद तक उपभोक्ता की खरीदारी की आदतों की जाँच करता है। इसमें किसी कंपनी या ब्रांड से जुड़ते समय खरीदार की भावनात्मक, मानसिक और व्यवहारिक प्रतिक्रियाएँ शामिल हैं। और यह मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, मानवशास्त्र, मार्केटिंग, अर्थशास्त्र और बिहेवियरल इकोनॉमिक्स के विचारों और तत्वों को एक साथ जोड़ता है।

खरीदारों को समझना क्यों ज़रूरी है?

अपने प्रोडक्ट का मार्केटिंग मिक्स तैयार करते समय यह जानना ज़रूरी है कि आपके प्रोडक्ट खरीदते समय लोगों की धारणाएँ, रवैये और कदम क्या होते हैं।

जब मार्केटर्स जान लेते हैं कि ग्राहक कैसे व्यवहार करते हैं, तो वे सोचे-समझे मार्केटिंग फ़ैसले ले सकते हैं। खरीदार के व्यवहार का अध्ययन हर प्रमोशन, प्रोडक्ट लॉन्च और विज्ञापन गतिविधि को प्रभावित करता है। 

आइए थोड़ा गहराई से देखें कि खरीदारों के खरीदारी व्यवहार को क्या प्रभावित करता है।

खरीद के व्यवहार को क्या प्रभावित करता है?

खरीदार के व्यवहार के बारे में पहली बात जो आपको जाननी चाहिए, वह यह है कि खरीदार कैसे व्यवहार करते हैं, इस पर अंदरूनी और बाहरी कारक असर डालते हैं। 

 अंदरूनी कारक उपभोक्ता के व्यक्तित्व, धारणा, मूल्यों और आत्म-छवि जैसे पहलुओं से जुड़े होते हैं। उदाहरण के लिए, किसी बड़ी फ़ाइनेंशियल कंपनी का कंट्री मैनेजर एक महँगी कार इसलिए खरीद सकता है क्योंकि वह उसकी आत्म-छवि से मेल खाती है। सेल्स रिप्रेज़ेंटेटिव्स और मार्केटिंग मैनेजर्स को अपने प्रोडक्ट्स के मार्केटिंग कैंपेन बनाते समय इन पहलुओं का विश्लेषण करना होता है।

 बाहरी कारक इनमें बँटते हैं:

  • सांस्कृतिक और सामाजिक कारक: उपभोक्ता अक्सर उन लोगों की नकल करते हैं जिन्हें वे पसंद करते हैं, या उनकी राय को ध्यान में रखते हैं
  • खरीद के स्थान से जुड़े कारक: खरीदार का व्यवहार कई पहलुओं से प्रभावित होता है, जैसे प्रोडक्ट छूने और देखने में कैसा है, उसकी पैकेजिंग, स्टोर का लेआउट, प्रोडक्ट प्लेसमेंट और प्लानोग्राम, विज्ञापन और प्रमोशन, ग्राहक सेवा, बैकग्राउंड म्यूज़िक और अन्य।

खरीदार के व्यवहार को प्रभावित करने वाले बाहरी कारकों को कैसे बेहतर बनाया जाए, ताकि बिक्री बढ़े या ग्राहक अनुभव सुधरे, यह तय करने के लिए खरीदार के व्यवहार का विश्लेषण ज़रूरी है, ताकि पता चल सके कि किसी खास प्रोडक्ट और किसी खास स्टोर में सबसे अच्छे नतीजे किससे मिलते हैं।

खरीदार के खरीदारी व्यवहार का विश्लेषण कहाँ किया जा सकता है?

आजकल ओमनीचैनल की बात होती है, यानी खरीदार के व्यवहार को ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों जगह देखना। जब उपभोक्ता किसी प्रोडक्ट के बारे में और जानना या उसे खरीदना चाहते हैं, तो वे कई कदम एक क्रम में उठाते हैं। ऑनलाइन माहौल में आप इन कदमों का विश्लेषण कर सकते हैं: वे किस वेबसाइट से आए, कौन-से पेज देखे, किन प्रोडक्ट्स पर क्लिक किया, खास पेजों पर कितना समय बिताया, और कब और कैसे खरीदारी की।

इसीलिए मार्केटिंग मैनेजर, रिसर्च एजेंसियाँ और रिटेलर्स इन चैनलों के ज़रिए खरीदार अपने ब्रांड और प्रोडक्ट्स से कैसे जुड़ते हैं, इसका समग्र विश्लेषण करते हैं।

आगे के पैराग्राफ़ में हम रिटेल दुकानों के लिए खरीदार के व्यवहार के विश्लेषण के समाधानों और टूल्स पर बात करेंगे। फिर हम ऐसे उदाहरण और टूल्स साझा करेंगे जिनका उपयोग रिटेल स्टोर मैनेजर ऑफ़लाइन खरीद के स्थान पर खरीदार के व्यवहार को समझने के लिए करते हैं।

खरीदारों का व्यवहार

स्टोर में खरीदार के खरीदारी व्यवहार को कैसे मापें और उसका विश्लेषण करें?

स्टोर के माहौल में उपभोक्ता के खरीदारी व्यवहार को देखने के लिए ज़्यादातर रिटेलर्स इस तरह के समाधान इस्तेमाल करते हैं:

  • आधुनिक POS: कुछ आधुनिक पॉइंट ऑफ़ सेल सिस्टम सिर्फ़ अलग-अलग सामान बेचने के लिए ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की संख्या, बिक्री के ट्रेंड, प्रॉफ़िट मार्जिन जैसी रिपोर्ट और मेट्रिक्स बनाने के लिए भी बनाए जाते हैं
  • फ़ुटफ़ॉल एनालिटिक्स समाधान: ये पीपल काउंटर और बीकन के रूप में आते हैं, जो रिटेलर्स को यह आकलन करने में मदद करते हैं कि नेविगेशन सिस्टम या स्टोर का डिज़ाइन कितना अच्छा है 
  • लोकेशन बीकन वाली स्मार्ट ट्रॉलियाँ
  • स्टोर का Wi-Fi नेटवर्क: यह देखने के लिए कि कितने खरीदार स्टोर में आते हैं और वे किन हिस्सों में गए
  • विज़ुअल सिस्टम (कैमरा सिस्टम, ऑप्टिकल 3D सेंसर)

खरीदार के तार्किक डेटा से भावनात्मक व्यवहार तक

स्टोर में आने वाले लोगों की गिनती, उम्र और लिंग जैसी जनसांख्यिकीय जानकारी पहचानना, या स्टोर के अंदर लोगों की आवाजाही ट्रैक करना, ये सब आपके ब्रांड और दुकान के लिए बेहद अहम हैं।

लेकिन आपको ऐसे टूल्स भी चाहिए जो आपके उपभोक्ताओं की भावनात्मक स्थिति मापें। लोग बहुत से फ़ैसले भावनाओं या सहज प्रवृत्ति से लेते हैं। 

जैसा कि हमने लेख की शुरुआत में कहा, खरीदार के व्यवहार का विश्लेषण करने का मतलब है मूल्यों, आत्म-छवि और धारणा जैसे मानवीय फ़ैसलों के अंदरूनी कारकों से जूझना।

खरीदार का व्यवहार और आई ट्रैकिंग

कोई खरीदार आपके प्रोडक्ट को कैसे देखता है, यह समझने के लिए आपको प्रोडक्ट से जुड़ते समय उसकी प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण करना होगा।

खरीदार के व्यवहार को देखने, मापने और उसका विश्लेषण करने का एक नया तरीका, जिसे शुरुआती दौर में ही अपनाया गया है, AI-आधारित टेक्नोलॉजी के रूप में आता है जो फ़ेस डिटेक्शन और आई ट्रैकिंग पर निर्भर है।

3D आई ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी उन AI-आधारित टेक्नोलॉजी में से एक है जिनसे आप शॉपर रिसर्च कर सकते हैं, और साथ ही प्राइवेसी प्राथमिकता बनी रहती है।

यह टेक्नोलॉजी रीयल-टाइम में इस तरह के सवालों के जवाब पाने में आपकी मदद करेगी:

  • क्या खरीदारों ने मेरा प्रोडक्ट देखा?
  • अगर देखा, तो क्या उन्होंने उस पर विचार किया, या बस एक नज़र डाली?
  • उन्होंने प्रोडक्ट को कितनी बार देखा?
  • क्या उन्होंने प्रतिस्पर्धी का प्रोडक्ट भी देखा? अगर हाँ, तो क्या उन्होंने दोनों प्रोडक्ट्स की तुलना की? उन्होंने मेरे प्रोडक्ट और प्रतिस्पर्धी के प्रोडक्ट को देखने में कितना-कितना समय बिताया?

खरीदार के इस तरह के व्यवहार और ध्यान का विश्लेषण आपको रीयल-टाइम जानकारी और ट्रेंड्स देता है, जो डेटा-आधारित फ़ैसले लेने में मदद करते हैं।

खरीदार के दृश्य व्यवहार को मापने के लिए 3D आई ट्रैकिंग का उपयोग

 मार्केटिंग मैनेजर ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों जगह आई ट्रैकिंग का उपयोग यह जानने के लिए करते हैं कि खरीदार प्रोडक्ट्स या जगहों से कैसे जुड़ते हैं और कौन-से प्रोडक्ट, प्रमोशन और डिज़ाइन उनका ध्यान खींचते हैं। 

मार्केटर्स आई ट्रैकिंग के ज़रिए खरीदार के व्यवहार का विश्लेषण इसलिए करते हैं क्योंकि हमारी आँखें ही बाज़ार से जुड़ने का हमारा मुख्य ज़रिया हैं।

खरीदार का व्यवहार और शॉपर डेटा

अब तक आई ट्रैकिंग का मतलब था खास चश्मे या हेडसेट, जो खरीदारी के दौरान ग्राहकों या मिस्ट्री शॉपर्स को पहनने के लिए दिए जाते थे। 

लेकिन पारंपरिक चश्मों से आई ट्रैकिंग खरीदार के व्यवहार को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि व्यक्ति जानता है कि उसकी हरकतें रिकॉर्ड हो रही हैं और उनका विश्लेषण किया जा रहा है। जब उपभोक्ता को पता होता है कि उसकी हरकतें रिकॉर्ड हो रही हैं, तो वे उतनी स्वाभाविक और सहज नहीं रहतीं जितनी आप चाहते हैं। निगरानी का एहसास होने पर खरीदार की हरकतें अनचाहे ही कुछ ज़्यादा सोची-समझी हो जाती हैं और बाद में दिए गए तर्कों से बदल जाती हैं।

3D आई ट्रैकिंग कैसे काम करती है

यहीं पर रिमोट 3D आई ट्रैकिंग काम आती है: ध्यान मापने का एक नया तरीका, जो बिना दखल दिए और गुमनाम रूप से खरीदार के असली और बिना बदले व्यवहार को दर्ज करता है, यानी वे शेल्फ़ के सामने स्वाभाविक रूप से कैसे पेश आते हैं।

Eyeware में हमने मार्केट रिसर्च और आई ट्रैकिंग को एक कदम आगे बढ़ाया है। हमने 3D आई ट्रैकिंग से खरीदार के ध्यान का डेटा जुटाने का एक तरीका बनाया है, जो 1.3m (4.3 ft) तक की दूरी से रिमोट रूप से दृश्य ध्यान को ट्रैक करता है। 

इसका मतलब है:

  • कोई चश्मा नहीं: यह बिना दखल वाला तरीका है
  • कोई VR हेडसेट नहीं: खरीदारी के दौरान खरीदार पर किसी भारी चीज़ का बोझ नहीं होता
  • खरीदार से कोई निजी संपर्क नहीं: सब कुछ गुमनाम और GDPR के अनुकूल है 

आप कई लोगों को एक साथ ट्रैक कर सकते हैं, खुली जगह में रुचि की वस्तुओं (शेल्फ़, डिस्प्ले या अन्य मर्चेंडाइज़िंग आइटम) को लेबल कर सकते हैं और रीयल-टाइम में उनकी ओर ध्यान ट्रैक कर सकते हैं। यह आप ऑफ़-द-शेल्फ़ 3D कैमरों और GazeSense से कर सकते हैं। GazeSense एक 3D आई ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर है, जिसे आपके स्टोर या विश्लेषण के बिंदु (शेल्फ़ डिस्प्ले, प्रोडक्ट्स आदि) को मैप करने के लिए बनाया गया है।

शेल्फ़ या पॉइंट ऑफ़ सेल पर एक छोटा, कम दिखने वाला सेंसर लगाकर खरीदार के ध्यान का डेटा रीयल-टाइम में पाया जा सकता है या बाद के विश्लेषण के लिए सेव किया जा सकता है।

खरीदार का व्यवहार और खरीद का फ़ैसला

अवचेतन खरीद व्यवहार और उपभोक्ता की आदतों तक पहुँच

इंसानी फ़ैसले उतने तार्किक नहीं होते जितना हम चाहते हैं। ज़्यादातर मानवीय व्यवहार अवचेतन स्तर पर शुरू होता है। व्यवहार की नकल समेत ये स्वचालित प्रक्रियाएँ उपभोक्ताओं के सचेत मन को शामिल किए बिना उनके रवैयों, धारणाओं और लक्ष्यों पर भी असर डालती हैं। 

उपभोक्ता की आदतें, जो एक तरह की स्वचालित प्रक्रिया हैं, ऐसे व्यवहार भी हैं जिन पर आसपास के माहौल का असर पड़ता है। ये आदतें कुछ हद तक हमारे इरादों और नियंत्रण से स्वतंत्र होती हैं, और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में उपभोक्ता इन्हीं से ब्रांड के फ़ैसले लेते हैं। एक क्लाइंट के साथ की गई हमारी एक स्टडी में पता चला कि खरीदार ऑटोपायलट पर थे। वे आम तौर पर गलियारे में एक मिनट से कम समय बिताते थे और एक ही प्रोडक्ट उठा लेते थे। खरीदार अक्सर वही ब्रांड खरीदते थे जो उन्हें सबसे पहले दिखा, और ज़रूरी नहीं कि उन्हें अपना ब्रांड मिला हो। खरीद का मुख्य आधार वह पहला प्रोडक्ट था जो ग्राहक को दिखा। लंबे समय तक सोच-विचार उतना आम नहीं था।

3D आई ट्रैकिंग स्टडी से आप किस तरह का खरीदार व्यवहार जुटा सकते हैं

रिमोट 3D आई ट्रैकिंग से आप देख सकते हैं कि खरीदार शेल्फ़ पर रखे प्रोडक्ट्स से कैसे जुड़ते हैं। 

कैसे? फ़िक्सेशन, गेज़ पॉइंट पर बार-बार लौटने और आँखों की हरकत से जुड़े अन्य व्यवहारों का विश्लेषण करके। इस तरह आपको खरीदारों के खरीद व्यवहार की जानकारी मिलेगी और आप पता लगा सकेंगे:

  • पूरे खरीदारी अनुभव के दौरान खरीदारों की भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ क्या होती हैं? खरीद के व्यवहार को भावनाएँ ही चलाती हैं। लोग उतने तार्किक नहीं होते जितना हम सोचते हैं: आँखों की हरकतें इस बात के सहज, बिना बदले संकेत हैं कि लोग किसी प्रोडक्ट को कैसे देखते हैं
  • खरीदार कितना आवेगी है?
  • आप जो मार्केट कर रहे हैं, उस पर अलग-अलग लिंग के लोग कैसी प्रतिक्रिया देते हैं?
  • आपके डिस्प्ले या प्रमोशन कैसा प्रदर्शन करते हैं?
  • आपके कितने शॉपर्स खरीदार बनते हैं?
  • वे कौन-से विकल्प हैं जिन पर खरीदार सबसे ज़्यादा समय बिताते हैं?
  • शेल्फ़ पर खरीदारों का ध्यान क्या खींचता है? चाहे वह आपका डिस्प्ले हो या आपके प्रतिस्पर्धी का प्रमोशन
  • फ़ोकस ग्रुप या सर्वे में खरीदार जो कहते और करते हैं, और दुकानों में जो करते हैं, उसमें क्या फ़र्क है?
  • क्या खास डिस्प्ले में निवेश करना फ़ायदेमंद है?
  • क्या आपकी नई पैकेजिंग काफ़ी दिखाई देती है और आकर्षक है?

खरीदारों के बारे में ऊपर बताई गई सभी तरह की जानकारियाँ उनके व्यवहार की गुत्थी सुलझा सकती हैं और खरीद तक के उनके रास्ते को प्रभावित करने के लिए डेटा-आधारित फ़ैसले लेने में आपकी मदद कर सकती हैं।

सारांश: खरीदार की बातों पर भरोसा करें, लेकिन सबसे ज़्यादा उसके व्यवहार पर

जैसा कि हमने देखा, उपभोक्ता की खरीद प्रक्रिया को क्या प्रभावित करता है, यह जानने से ब्रांड्स को अपने प्रोडक्ट्स और अपने प्रतिस्पर्धियों के बारे में ज़्यादा जानकारी मिलती है। कंपनियाँ पता लगा सकती हैं कि दो ब्रांड्स की तुलना करते समय खरीदार किन विशेषताओं और फ़ीचर्स को सबसे ज़्यादा महत्व देते हैं। 

हमारी सलाह है कि संभावित खरीदारों और खरीदारों की तार्किक धारणाओं (फ़ोकस ग्रुप जैसे पारंपरिक मार्केट रिसर्च से) और अवचेतन, बिना बदली धारणाओं और आवेगों, दोनों का आकलन करें। यह सारी जानकारी हाथ में होने से आप पता लगा सकेंगे कि कौन-से प्रोडक्ट्स और फ़ीचर्स निवेश पर सबसे ज़्यादा रिटर्न देते हैं। 

खरीदार के व्यवहार की बेहतर समझ के साथ प्रतिस्पर्धा में बढ़त पाने में हम आपकी मदद कर सकते हैं। Eyeware टीम से संपर्क करें, रीयल-टाइम रिमोट 3D आई ट्रैकिंग आज़माने में हमें आपकी मदद करके खुशी होगी!