3D आई ट्रैकिंग के टॉप 7 उपयोग और ऐप्लिकेशन
कहते हैं, आँखें आत्मा की खिड़की होती हैं। यह सच हो या न हो, इतना तो तय है कि आँखें हमें एक-दूसरे के बारे में बहुत कुछ बता सकती हैं। कोऑपरेटिव आई हाइपोथीसिस के अनुसार इंसानी आँख इस तरह विकसित हुई कि उसका सफ़ेद हिस्सा (स्क्लेरा) बड़ा और ज़्यादा चमकीला हो गया, ताकि हम एक-दूसरे की नज़र का पीछा करके बेहतर संवाद कर सकें। इंसान की इस खूबी को 3D आई ट्रैकिंग जैसी नई टेक्नोलॉजी के साथ जोड़कर हम अपने संवाद के तरीके और अपने आसपास की मशीनों को और आगे ले जा सकते हैं।
स्पीच रिकग्निशन, मोशन डिटेक्शन और टच कंट्रोल, ये सब हम रोज़मर्रा के डिवाइस में देख चुके हैं। एक ज़रूरी चीज़ जो अभी भी गायब है, वह है यूज़र की आँखों में देखकर उसका ध्यान, रुचि और जुड़ाव समझना, जैसा लोग एक-दूसरे से बात करते समय स्वाभाविक रूप से करते हैं। अटेंशन ट्रैकिंग पूरा खेल बदल देती है।
3D आई ट्रैकिंग, यानी आँखों की नज़र ट्रैक करने के लिए कंज़्यूमर डेप्थ-सेंसिंग कैमरों का उपयोग, अब ह्यूमन-मशीन इंटरैक्शन के लिए नए और रोमांचक उपयोग खोल रही है।
अलग-अलग क्षेत्रों में 3D आई ट्रैकिंग के प्रमुख उपयोग ये हैं:
1. रिटेल में अटेंशन ट्रैकिंग
शेल्फ़ पर ध्यान से जुड़ी मार्केट रिसर्च स्टडी के लिए पहले से चुने गए फ़ोकस ग्रुप को चश्मा पहनाने के बजाय, जिससे उनका व्यवहार प्रभावित हो सकता है, 3D आई ट्रैकिंग राह चलते लोगों की नज़र को सटीक रूप से और बिना दखल दिए ट्रैक करने देती है। ग्राहक के ध्यान पर नज़र रखकर रिटेलर्स प्रोडक्ट के प्रदर्शन का विश्लेषण कर सकते हैं। अटेंशन ट्रैकिंग कंपनियों को मूल्यवान एनालिटिक्स देती है। 3D आई ट्रैकिंग बिना कैलिब्रेशन के शेल्फ़-अटेंशन एनालिटिक्स दे सकती है, जो व्यूज़ की संख्या और फ़ोकल पॉइंट पहचानते हैं। मार्केट रिसर्च कंपनियाँ फिर इन जानकारियों का उपयोग रिटेलर्स को उनकी सेल्स रणनीति और ग्राहक अनुभव में सुधार सुझाने के लिए कर सकती हैं। आई ट्रैकिंग एनालिटिक्स आपकी कंपनी को प्रतिस्पर्धा में आगे ले जाएगी।
2. रोबोटिक्स के लिए आई ट्रैकिंग
दोनों मिलकर वस्तुओं के प्रति लोगों के इरादे और ध्यान को पहचान और उसका अनुमान लगा सकते हैं।
रोबोटिक्स में 3D गेज़ ट्रैकिंग इंसान और रोबोट के बीच ज़्यादा स्वाभाविक और सहयोगी इंटरैक्शन संभव बनाती है। फ़िलहाल रोबोट इंसान के जुड़ाव का स्तर सटीक रूप से नहीं पढ़ सकते। लेकिन आई ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर के साथ डेप्थ-सेंसिंग कैमरों की “आँखों की जोड़ी” मिलने पर वे एक 3D गेज़ वेक्टर बना सकते हैं। दोनों मिलकर वस्तुओं के प्रति लोगों के इरादे और ध्यान को पहचान, ट्रैक और उसका अनुमान लगा सकते हैं। इसके उपयोग कोलैबोरेटिव रोबोट, एजुकेशनल रोबोट, सर्विस रोबोट या असिस्टिव रोबोट में मिलते हैं, खासकर जहाँ हरकत की बड़ी रेंज और असली वस्तुओं के साथ इंटरैक्शन की ज़रूरत हो।
Stockholm के Royal Institute of Technology के प्रोफ़ेसर Joakim Gustaffson के इस एजुकेशनल रोबोट रिसर्च प्रोजेक्ट का डेमो देखें। 3D आई ट्रैकिंग के लिए इस्तेमाल किया गया सेंसर एक Intel RealSense कैमरा है, जिसे Furhat रोबोट के सामने रखा गया है।
3. ऑटोमोटिव के लिए आई ट्रैकिंग
ऑटोमोटिव इंडस्ट्री के लिए आई ट्रैकिंग सड़कों को ज़्यादा सुरक्षित बनाएगी। सीमित ट्रैकिंग बॉक्स और 3D में नज़र ट्रैक करने के लिए कई सेंसर वाले सेटअप की ज़रूरत, कारों में मौजूदा आई ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी के उपयोग को सीमित करती है। गेज़ रिकग्निशन इंसान और कार के इंटरैक्शन से जुड़ी दो मुख्य समस्याएँ हल करेगा।
ऑटोमोटिव: ड्राइवर मॉनिटरिंग और आई ट्रैकिंग
European New Car Assessment Programme (NCAP) के अनुसार, 2020 तक ड्राइवर मॉनिटरिंग को न सिर्फ़ “प्राइमरी सेफ़्टी” मानक माना जाएगा, बल्कि उनका यह भी कहना है कि “आकलन इस बात पर केंद्रित होगा कि ड्राइवर की स्थिति कितनी भरोसेमंद और सटीक तरीके से पहचानी जाती है।” इसलिए सेमी-ऑटोनॉमस कारों में निगरानी रखने और व्यवस्थित हैंडओवर संभव बनाने के लिए ड्राइवर का ध्यान पहचानना ज़रूरी होगा। भविष्य में ड्राइवर की लगातार निगरानी होगी, और डेप्थ-सेंसिंग कैमरों से उसका ध्यान ट्रैक किया जाएगा। कैमरों के डेटा से ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर ड्राइवर का ध्यान जाँचता है।
ऑटोमोटिव वर्चुअल को-पायलट
कारें रोबोट हैं। वे पहले से आवाज़ और जेस्चर कमांड के आधार पर ड्राइवर से इंटरैक्ट कर रही हैं। लेकिन ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में अटेंशन सेंसिंग और ट्रैकिंग पीछे रह गई है। ऑटोमोटिव सेक्टर के लिए 3D आई ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर “देखने वाले कार असिस्टेंट” को डैशबोर्ड, सेंट्रल कंसोल और मिरर जैसे इन-कार इन्फ़ोटेनमेंट सिस्टम के हिस्सों की ओर ड्राइवर और यात्रियों की नज़र पहचानने में सक्षम बना सकता है, साथ ही ऑगमेंटेड रियलिटी हेड-अप डिस्प्ले के साथ स्वाभाविक इंटरैक्शन संभव बना सकता है, और वर्चुअल को-पायलट को कार के बाहर की वस्तुओं की ओर नज़र पहचानने में भी सक्षम बना सकता है।
4. कंज़्यूमर डिवाइस
iPhone X या Xiaomi Mi8 जैसे मोबाइल फ़ोन, और यूज़र की ओर वाले डेप्थ-सेंसिंग कैमरे वाले लैपटॉप, किसी अतिरिक्त आई ट्रैकिंग डिवाइस के बिना 3D आई ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर चलाने के लिए अपग्रेड किए जा सकते हैं। तब डेप्थ-सेंसिंग कैमरा स्क्रीन के अलग-अलग हिस्सों पर ध्यान पहचान सकता है, जिससे यूज़र शायद आंशिक रूप से अपनी आँखों से डिवाइस चला सके। मोबाइल फ़ोन में आई ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी इनपुट का एक नया तरीका देकर यूज़र्स के अनुभव को काफ़ी बेहतर बनाएगी। गेमिंग लैपटॉप में 3D गेज़ ट्रैकिंग अवतारों के साथ इंटरैक्शन को बेहतर बनाकर, या स्क्रीन की भीड़ कम करने के लिए फ़ोकस से बाहर के इन्फ़ो मेन्यू को धुँधला करके गेमिंग अनुभव को और बढ़ा सकती है।
5. असिस्टिव टेक्नोलॉजी समाधान
कंज़्यूमर डेप्थ-सेंसिंग कैमरों का उपयोग करने वाले कस्टमाइज़्ड सॉफ़्टवेयर समाधान दिव्यांग यूज़र्स को कंप्यूटर चलाने में मदद कर सकते हैं, जिसमें माउस के काम सिर की हरकतों, चेहरे के हाव-भाव और गेज़ ट्रैकिंग से जोड़े जाते हैं। इस बेहतर सहायता से यूज़र ज़्यादा आसानी से बेहतर संवाद कर सकेगा। यूज़र किसी रोबोटिक असिस्टिव आर्म को अपनी रुचि की वस्तु की ओर भी ले जा सकते हैं, और थकाऊ जॉयस्टिक कंट्रोल की ज़रूरत न्यूनतम रह जाती है। नीचे दिए वीडियो में Carnegie Mellon University के Robotics Institute में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर Henny Admoni अपनी रिसर्च पेश करती हैं कि गेज़ रिकग्निशन इंसान और रोबोट के तालमेल को कैसे बेहतर बना सकता है।
6. विज्ञापन में आई ट्रैकिंग
विज्ञापनदाता ऐसे 3D आई ट्रैकिंग एनालिटिक्स का उपयोग करके आउटडोर विज्ञापनों पर उपभोक्ता के ध्यान और फ़ोकस का बेहतर विश्लेषण कर सकते हैं, जिनमें किसी कैलिब्रेशन प्रक्रिया की ज़रूरत नहीं होती।
ऑडियंस एनालिटिक्स विज्ञापन के व्यूज़ की संख्या, भावनात्मक प्रतिक्रिया, दिन का वह समय जब लोग सबसे ज़्यादा ध्यान देते हैं, और विज्ञापनदाता के लिए फ़ायदेमंद अन्य रीयल-टाइम आँकड़े बता सकते हैं।
7. व्यवहार संबंधी रिसर्च
शोधकर्ता ADHD और ऑटिज़्म जैसी स्थितियों में व्यवहार का अध्ययन करने के लिए आई ट्रैकिंग का उपयोग करते हैं, उदाहरण के लिए यह कि लोग दृश्य जानकारी को कैसे ग्रहण करते हैं। GazeSense एक रिसर्च टूल है, निदान उपकरण नहीं।
लेकिन खासकर बच्चों को मौजूदा आई ट्रैकर्स की ट्रैकिंग रेंज में बनाए रखना अक्सर मुश्किल होता है, और कभी-कभी सख्त कैलिब्रेशन प्रक्रिया का पालन कराना असंभव भी। 3D आई ट्रैकिंग ज़्यादा बड़ी ट्रैकिंग रेंज, सिर की कई चरम स्थितियों में ट्रैकिंग और बिना कैलिब्रेशन के ट्रैकिंग के विकल्प के साथ इन दिक्कतों को कम कर सकती है। उदाहरण के लिए, Eyeware के आई ट्रैकिंग सॉफ़्टवेयर के फ़ायदे हैं: कोई चश्मा नहीं, और कंज़्यूमर डेप्थ-सेंसिंग कैमरों का उपयोग।